गुरुवार, 29 जनवरी 2009

एडवांस कने कम बनू

हम अपना ब्लाग के माध्यमसँ एक बेर अहाँ सबके मैथिली मे गारि देबा सँ चेता चुकल छी। एक बेर फेर दिल्ली-पंजाब कमय बलाकेँ किछु भाषाई दिक्कतसँ सचेत करए चाहैत छी। दरअसल बहरबैया सभकेँ अपना-आपके किछु विशेष एडवांस करबाके चक्कर में आई-काल्हि ई फैशन भए गेल छनि कि घर में धिया-पुताक संग अंग्रेजीक शब्द विशेष इस्तेमाल करए लगलाह अछि। एहि सँ संबंधित एकटा सत गप्प बताबए चाहैत छी। कोजागरा के राति छलै। भार में खूब रास केरा आएल छलै। एकटा नेना के केरा लेबाक इच्छा भेलै। ओ नानी के कहलकै जे ‘बनाना’ लेब। नानी अंग्रेजी नै बूझि पौलखिन तेँ बच्चा के बात के अनसुना कए देलखिन। बच्चा फेरो दोहरेलकै जे बनाना लेब। नानी फेर नै देलखिन त बच्चा बपहारि तोड़ए लागल। नानी कोरा मे उठा के पुचकारि के पूछए लागलखिन जे गै बाबू की लेब कहू ने। बच्चा कहलक बनाना। नानी कहलखिन कहू न कथी ‘बना देब’। बच्चा कहलक बनाना। नानी फेर पुछलखिन कथी बना देब से त बाजू। बच्चा बनाना-बनाना के रट लगबैत अंगना के दलोमलित कए देलक। एतबे मे बच्चा के कानब सुनि मय हकासल-पियासल दौड़ल अएलीह। जखन पता चललैन्ह जे बच्चा केरा लेल कनैत अछि त मए पर बरसि पड़लीह। मए के कहली जे तोरा बुते एकटा केरा नै भेलौ देल। मए कहए लगलखीन इ त किदैन बना देबए कहैत छलौ। दुने माय-धी के बहस होमए लागल आ माहौल गरमय गेल। तैं सचेत करैत छी जे बच्चा के कने-मने अपनो भाषा के ज्ञान दियौ नै तँ अपने पर बिसैत। अंग्रेजी बुझनाइ कोना खराब नै मुदा ओ हिंदी सेहो बुझए। सिक्सटी नाइन बुझए त’ उन्नहत्तर सेहो बुझे एकर खयाल जरूर राखी।

2 टिप्‍पणियां:

editor ने कहा…

nik likhe chi

जितेन्द्र झा जनकपुर ने कहा…

Roshan ji Maithili Me Ahak Blog Dekhi Khushi Lagal. Nirantar Likhait rahab se Aasa Aicha. jitendra jha